जय माता दी दोस्तों, मातारानी का पावन पर्व बहुत ही जल्द आने वाला है| और हम सभी लोग मैया को अपने घर में बुलाना चाहते है, और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते है| नवरात्री को सनातन धर्म के पर्वो में से मुख्य पर्व माना जाता है| इसे पुरे देश में बहुत ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है| वैसे तो पुरे साल में चार नवरात्री होती है, इनमें से दो गुप्त नवरात्री, तीसरा चैत्र नवरात्री और चौथा शारदीय नवरात्री| नौ दिनों तक चलने वाला ये पर्व माँ दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों को समर्पित है|
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदी नववर्ष की शुरुआत होती है| श्री ब्रम्हा जी ने सृष्टि निर्माण की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही की थी इसलिए इसे नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है| चैत्र नवरात्री को सबसे पहले और बड़े नवरात्री कहा जाता है| नवरत्रि में पूजा पाठ करने से साल भर ग्रहो की स्तिथि अनुकूल रहती है| घर में धन-धान्य की कभी भी कमी नहीं रहती है|
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदी नववर्ष की शुरुआत होती है| श्री ब्रम्हा जी ने सृष्टि निर्माण की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही की थी इसलिए इसे नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है| चैत्र नवरात्री को सबसे पहले और बड़े नवरात्री कहा जाता है| नवरत्रि में पूजा पाठ करने से साल भर ग्रहो की स्तिथि अनुकूल रहती है| घर में धन-धान्य की कभी भी कमी नहीं रहती है|
दोस्तों इस वर्ष चैत्र नवरात्री 18 मार्च दिन रविवार से प्रारम्भ होकर 26 मार्च दिन सोमवार को समापन होगा| नवरात्री के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है|
प्रथम नवरात्र - माँ शैलपुत्री
दूसरा नवरात्र - माँ ब्रम्ह्चारिणी
तीसरा नवरात्र - माँ चंद्रघंटा
चौथा नवरात्र - माँ कुष्मांडा
पांचवा नवरात्र - स्कन्दामाता
छठा नवरात्र - माँ कात्यानी
सातवां नवरात्र - माँ कालरात्रि
आठवां नवरात्र - माँ महागौरी
नवां नवरात्र - माँ सिद्धिदात्री
वैसे माँ शक्ति के तीन रूप है माँ महालक्ष्मी, माँ महाकाली और माँ महासरस्वती इन स्वरूपों की पूजा करके जीवन में धन, वैभव, यश, मान, सम्मान, प्रतिष्ठा और बुद्धि, विवेक की प्राप्ति होती है| इन नौ दिनों में देवी के भक्त नौ दिनों तक माता का दरबार अपने घर पर सजाते है, घट स्थापना करते है, पूजा और व्रत करते है|
दोस्तों, कलश को सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य तथा सभी प्रकार के मंगल कामनाओं का प्रतीक माना जाता है| ऐसी मान्यता है कि कलश के मुख में स्वयं हरि विष्णु जी वास करते है, इसके कंठ में रूद्र तथा मूल में ब्रम्हा जी विराजते है, और कलश के मध्य में सभी शक्तियां विराजती है|
इस बार घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:31 मिनट से लेकर सुबह 7:46 मिनट तक रहेगा| नवरात्री में घट स्थापना शुभ मुहूर्त देखकर ही करना चाहिए क्योकि घट स्थापना करके ही हम माँ दुर्गा का आवाहन कर पूजा के लिए निमंत्रित करते है|
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